गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पाठ | Gajendra Moksha in Hindi

‘‘ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

गजेन्द्र मोक्ष:- हिंदू धर्म मे कई ऐसे मंत्र व स्त्रोत है, जिनके उच्चारण से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते है, गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत एक दिव्य हाथी व भगवान विष्णु जी के बीच का संवाद है। इस मंत्र के उच्चारण से जीवन असीम आनंदों से परिपूर्ण हो जाता है। प्रतिदिन गजेन्द्र मोक्ष के जाप से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

गजेंद्र स्तोत्र का वर्णन ”श्रीमद्भगवदगीता” के तीसरे अध्याय मे वर्णित है। जो की हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों मे से एक है। हिन्दू धर्म के अनुसार गजेंद्र स्तोत्र का जाप करने से जीवन आनंदमय होता है एवं जीवन के सभी कष्टों निवारण मिलता है।

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पाठ | Gajendra Moksha in Hind

ईश्वर अनंत है एवं इसकी शक्तियां भी अनंत है, जब तक आप पूरे विश्वास से किसी भी ईश्वर की प्रार्थना नही करते, तब तक आप आस्था का फल नही प्राप्त कर सकते, इसलिये मंत्र का जाप करने से पहले मन को शांत करेंं,और पूरे विश्वास व आस्था के साथ मंत्रों का उच्चारण, आपकी सारी मनोकामना अवश्य पूर्ण – भगवान विष्णु के 108 नाम

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र – Gajendra Moksha Stotra

श्रीमद्भागवतान्तर्गतगजेन्द्र कृत भगवान का स्तवन श्री शुक उवाच

एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि।
 जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम॥

ओंम नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम
पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ||

यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम
योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम ||

यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम
अविद्धदृक्साक्ष्युभयं तदीक्षते स आत्ममूलोऽवतु मां परात्परः ||

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कालेन पञ्चत्वमितेषु कृत्स्नशो लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु
तमस्तदासीद्गहनं गभीरं यस्तस्य पारेऽभिविराजते विभुः ||

न यस्य देवा ऋषयः पदं विदुर्जन्तुः पुनः कोऽर्हति गन्तुमीरितुम
यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो दुरत्ययानुक्रमणः स मावतु ||

दिदृक्षवो यस्य पदं सुमङ्गलं विमुक्तसङ्गा मुनयः सुसाधवः
चरन्त्यलोकव्रतमव्रणं वने भूतात्मभूताः सुहृदः स मे गतिः ||

न विद्यते यस्य च जन्म कर्म वा न नामरूपे गुणदोष एव वा
तथापि लोकाप्ययसम्भवाय यः स्वमायया तान्यनुकालमृच्छति ||

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तस्मै नमः परेशाय ब्रह्मणेऽनन्तशक्तये
अरूपायोरुरूपाय नम आश्चर्यकर्मणे ||

नम आत्मप्रदीपाय साक्षिणे परमात्मने
नमो गिरां विदूराय मनसश्चेतसामपि ||

सत्त्वेन प्रतिलभ्याय नैष्कर्म्येण विपश्चिता
नमः कैवल्यनाथाय निर्वाणसुखसंविदे ||

नमः शान्ताय घोराय मूढाय गुणधर्मिणे
निर्विशेषाय साम्याय नमो ज्ञानघनाय च ||

क्षेत्रज्ञाय नमस्तुभ्यं सर्वाध्यक्षाय साक्षिणे
पुरुषायात्ममूलाय मूलप्रकृतये नमः ||

सर्वेन्द्रियगुणद्रष्ट्रे सर्वप्रत्ययहेतवे
असता च्छाययोक्ताय सदाभासाय ते नमः ||

नमो नमस्तेऽखिलकारणाय निष्कारणायाद्भुतकारणाय
सर्वागमाम्नायमहार्णवाय नमोऽपवर्गाय परायणाय ||

गुणारणिच्छन्नचिदुष्मपाय तत्क्षोभविस्फूर्जितमानसाय
नैष्कर्म्यभावेन विवर्जितागम स्वयंप्रकाशाय नमस्करोमि ||

मादृक्प्रपन्नपशुपाशविमोक्षणाय मुक्ताय भूरिकरुणाय नमोऽलयाय
स्वांशेन सर्वतनुभृन्मनसि प्रतीत प्रत्यग्दृशे भगवते बृहते नमस्ते ||

आत्मात्मजाप्तगृहवित्तजनेषु सक्तैर्दुष्प्रापणाय गुणसङ्गविवर्जिताय
मुक्तात्मभिः स्वहृदये परिभाविताय ज्ञानात्मने भगवते नम ईश्वराय ||

यं धर्मकामार्थविमुक्तिकामा भजन्त इष्टां गतिमाप्नुवन्ति
किं चाशिषो रात्यपि देहमव्ययं करोतु मेऽदभ्रदयो विमोक्षणम ||

एकान्तिनो यस्य न कञ्चनार्थं वाञ्छन्ति ये वै भगवत्प्रपन्नाः
अत्यद्भुतं तच्चरितं सुमङ्गलं गायन्त आनन्दसमुद्रमग्नाः ||

तमक्षरं ब्रह्म परं परेशमव्यक्तमाध्यात्मिकयोगगम्यम
अतीन्द्रियं सूक्ष्ममिवातिदूरमनन्तमाद्यं परिपूर्णमीडे ||

यस्य ब्रह्मादयो देवा वेदा लोकाश्चराचराः
नामरूपविभेदेन फल्ग्व्या च कलया कृताः ||

यथार्चिषोऽग्नेः सवितुर्गभस्तयो निर्यान्ति संयान्त्यसकृत्स्वरोचिषः
तथा यतोऽयं गुणसम्प्रवाहो बुद्धिर्मनः खानि शरीरसर्गाः ||

स वै न देवासुरमर्त्यतिर्यङ्न स्त्री न षण्ढो न पुमान्न जन्तुः
नायं गुणः कर्म न सन्न चासन्निषेधशेषो जयतादशेषः ||

जिजीविषे नाहमिहामुया किमन्तर्बहिश्चावृतयेभयोन्या
इच्छामि कालेन न यस्य विप्लवस्तस्यात्मलोकावरणस्य मोक्षम ||

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सोऽहं विश्वसृजं विश्वमविश्वं विश्ववेदसम
विश्वात्मानमजं ब्रह्म प्रणतोऽस्मि परं पदम ||

योगरन्धितकर्माणो हृदि योगविभाविते
योगिनो यं प्रपश्यन्ति योगेशं तं नतोऽस्म्यहम ||

नमो नमस्तुभ्यमसह्यवेग शक्तित्रयायाखिलधीगुणाय
प्रपन्नपालाय दुरन्तशक्तये कदिन्द्रियाणामनवाप्यवर्त्मने ||

नायं वेद स्वमात्मानं यच्छक्त्याहंधिया हतम
तं दुरत्ययमाहात्म्यं भगवन्तमितोऽस्म्यहम ||

सोर्स:- Bhakti Dhara

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र पाठ का अर्थ – Gajendra Moksha meaning in Hindi – Click here

इस लेख मे हमने गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र को पढा, अगर आप रोजाना गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करते है, तो कमेंट मे इसके फायदे अवश्य बतायें, ताकि अन्य भक्तों को प्रेरणा मिल सकें। ‘‘ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

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