धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक अर्थ। Dharmo Rakshati Rakshitah

धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक का अर्थ जाने । Dharmo Rakshati Rakshitah shlok ka arth

धर्मो रक्षति रक्षितः फोटो

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय: हमारा भारत देश एक आध्यात्मिक देश है, ये देवी-देवताओ की भूमी भी मानी जाती है, जब भी पृथ्वी पर अन्याय, दुष्टो का प्रकोप बढता है, तब-तब ईश्वर मानव रुप लेकर पृथ्वी पर जन्म लेते है। और पृथ्वी को अन्यान मुक्त करते है, हमारे भारत देश को लाखो-करोडो वर्ष पहले से ही अध्यात्मिक देश, विश्वगुरु, व संतो की नगरी, मानी जाती है।

धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक सस्कृति भाषा मे लिखित हिंदू धर्मग्रंथ महाभारत व मनुस्मृति का एक अंश है। इस श्लोक का अर्थ है की, “जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।”

धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ॥

श्लोक

धर्मो रक्षति रक्षितः का अर्थ – तुम धर्म की रक्षा करो, धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा।

अर्थात:- जो मनुष्य धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। धर्म की रक्षा करने वाला मनुष्य कभी पराजित नही होता, क्योकि उसकी रक्षा स्वय धर्म (ईश्वर, मनुष्य, प्रकृति, ब्रम्हाण्ड, इत्यादि) करता है।

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धर्मो रक्षति रक्षितः | Dharmo Rakshati Rakshitah Status

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