राजा जनक: मिथिला नरेश का जीवन परिचय | Raja Janak ka Jivan Parichay

Raja Janak: राजा जनक एक महान सद्पुरुष, धर्मी, न्यायप्रिय, और सभी जीवों पर दया करने वाले महान राजा थे। जो की भारत के उत्तरी राज्य मिथिला के महाराजा थे, जिसे विदेह राज्य के नाम से भी जाना जाता है। जो की वर्तमान मे बिहार के ‘दरभंगा, मुंगेर, तिरहुत, भागलपुर, कोसी, पूर्णिया’ तथा झारखण्ड के संथाल परगना प्रमंडल और नेपाल के तराई क्षेत्रों मे बट गया है। इन क्षेत्रों की मुख्य भाषा मैथिली है। मैथिली राज्य का उल्लेख हिंदू धर्म ग्रंथों के साथ-साथ बौध्द व जैन धर्म मे भी अंकित है।

Raja Janak

इस लेख मे हम मिथिला के महाराजा, राजा जनक (Raja Janak) जी का जीवन परिचय पढेंगे। साथ ही राजा जनक पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देखेंगे। यह लेख आप के लिये कितना शिक्षाप्रद रहा, हमें अवश्य बतायें ।

राजा जनक का जीवन परिचय -Raja Janak ka Jivan Parichay

राजा जनक जिन्हें विदेह के नाम से भी जाना जाता है। इनका मूलनाम सिरध्वज था इनका जन्म त्रेतायुग मे राजा निमि के यहाँ हुआ था जो मिथिला के महाराजा थे। जिसकी राजधानी जनकपुर था। राजा निमि के मृत्यु के बाद मिथिला के राजगद्दी पर राजा जनक जी बैठे, जो की वर्तमान मे बिहार, झारखण्ड, और नेपाल के कुछ हिस्सों मे बट गया है।

राजा जनक का का जन्म : मान्यतायों के अनुसार मिथिला के महाराज राजा जनक का जन्म उनके पिता निमि के मृत्यु शरीर से हुआ था। जिससे कारण उनका नाम जनक पडा। देखे- हनुमान जी के 108 नाम

नाम राजा जनक / विदेह / सिरध्वज
राज राज्य मिथिला (जनकपुर)
पिता का नाम निमी
जन्म युग त्रेतायुग (रामायण काल)
वंश / गोत्र मिथिलावंश , निमि
भाई का नाम कुशध्वज (छोटा भाई)
संतान सीता / उर्मिला

  जानकी, वैदेही, भूमिजा, रामप्रिया, जनकतनया, जनकनन्दिनी,

सीता का पर्यायवाची

राजा जनक के माता-पिता का नाम: राजा जनक के पिता का नाम निमि था जो की इक्षावकु के पुत्र और मनु के पौत्र माने जाते है। ये मिथिला के राजा थे। राजा जनक का वास्तविक नाम सिरध्वज था तथा इनके भाई का नाम कुशध्वज था। एवं इनके पुत्री का ना सीता था, जिनका विवाह प्रभू श्रीराम से हुआ ।

राजा जनक (Raja Janak) अपने आध्यात्मिक ज्ञान व तत्वज्ञान के लिये बहुत प्रसिध्द थे, चारों तरफ उनके विद्वता की चर्चा होती थी, राजा जनक ने अपने जीवन मे कई पुण्य कार्य कियें, माना जाता है की सभी सुख-सुविधा होने के वावजुद भी राजा जनक सन्यासी का जीवन व्यतीत करते थे।

वर्तमान मे मिथिला के प्रमुख शहर

वर्तमान मे मिथिला राज्य अधिकतर बिहार राज्य मे स्थिति है, लेकिन मिथिला बिहार के साथ – साथ झारखण्ड और नेपाल के कुछ हिस्सो मे भी बट गया है। जो की निम्नलिखित है। देखे- बिहार का मानचित्र

  • दरभंगा (बिहार)
  • दुमका (झारखण्ड)
  • सीतामढी (बिहार)
  • जनकपुरधाम (नेपाल)
  • सहरसा (बिहार)
  • कटिहार (बिहार)
  • किशनगंज (बिहार)
  • बेगूसराय (बिहार)
  • मुजफ्फरपुर (बिहार)
  • पूर्णिया (बिहार)
  • मधुबनी (बिहार)
  • भागलपुर (बिहार)
  • देवघर (झारखण्ड)
  • समस्तीपुर (बिहार)
  • अररिया (बिहार)
  • जनकपुर (नेपाल)
क्रेडिट- Mithila Dekho YouTube Channel

जनक द्वारा माता सीता का विवाह (Raja Janak Nandini Sita Swayamvar)

राजा जनक के पास भगवान शिव जी के द्वारा दिया गया एक अद्वितीय धनुष था, जिसे राजा जनक रोजाना पूजा करते थे, एक दिन उन्होने देखा की उनकी पुत्री सीता धनुष उठा कर उसकी साफ-सफाई कर रही थी, राजा जनक अचम्भित हो गयें, क्योकि वह साधारण धनुष, उसे उठाना किसी सामान्य मनुष्य के बस का नही था, तभी से राजा जनक (Raja Janak) ने निर्णय लिया की जो भी इस उठा कर इसके एक छोर से अगले छोर तक धागा पहनायेगा, उससे मेरी पुत्री का विवाह होगा।

कुछ वर्षों बाद जब माता सीता विवाह योग्य हो गयी तब राजा जनक ने भव्य स्वयंवर का आयोजन किया तथा इसमें चारो दिशाओं के राजाओं को आमंत्रण किया गया। ताकि राजा अपनी पुत्री सीता के लिए सर्वश्रेष्ठ वर चुन सके। भगवान श्रीराम गुरु विश्वामित्र के साथ – साथ अन्य देशों के राजा स्वंम्बर मे उपस्थिति थे। राजा जनक ने भगवान शिव जी के धनुष को स्वयंवर में रख दिया और सभी राजाओ को प्रस्ताव दिया की जो भी इस धनुष को उठाकर प्रत्यंचा (धनुष की डोर) चढ़ा देगा उसका विवाह हमारी पुत्री सीता से होगा। मन को शांत कैसे करें

धीरे-धीरे सभी राजा आते गये और धनुष उठाने का प्रयास करते गये लेकिन सभी लोग शिव धनुष उठाने मे असफल रहे। राजा जनक अत्यंत निराश हो गए और भरी सभा में अपना दुःख व्यक्त किया, और कहाँ क्या कोई इस पृथ्वी पर इतना शक्तिशाली नही जो यह यह धनुष उठा सके, और हमारे पुत्री सीता से विवाह रचा सके।

तभी प्रभू श्रीराम के गुरु विश्वामित्र जी ने प्रभू राम को आदेश दिया की वो स्वयंवर में भाग ले और धनुष उठाकर उसपर प्रत्यंचा चढ़ाये। प्रभू श्रीराम ने अपने गुरु की आज्ञा मानी और शिव धनुष को उठाकर उसपर प्रत्यंचा चढा दी, यह देखकर राजा जनक सहित सभी राजदरबारी बहुत प्रसन्न हुए । और राजा जनक (Raja Janak) के वचन अनुसार उन्होने अपने पुत्री सीता का विवाह भगवान श्रीराम जी से किया।

FAQ – लोगों ने पूछा

प्रश्न- राजा जनक कहांं के राजा थे ?
मिथिला, जनकपुर

प्रश्न- राजा जनक के पिता का क्या नाम था ?
निमि

प्रश्न-राजा जनक का वास्तविक नाम क्या था ?
सिरध्वज

प्रश्न- राजा जनक के पुत्री का क्या नाम था ?
माता सीता

प्रश्न- राजा जनक के पुत्री का विवाह किससे हुआ ?
प्रभु श्रीराम से

प्रश्न-मिथिला राज्य कहाँ है ?
मिथिला राज्य वर्तमान मे बिहार, झारखण्ड, और नेपाल का कुछ हिस्सा है।

प्रश्न-राजा जनक के भाई का क्या नाम था ?
कुशध्वज

प्रश्न-राजा जनक का जन्म किस युग मे हुआ था ?
त्रेतायुग मे।

इस लेख मे दी गई जानकारी मिडिया, एप्प, इंटरनेट, पर उपलब्ध जानकारियों से एकत्रित की गई है, लेख मे किसी भी प्रकार के त्रुटि के लिये क्षमा करे, एवं कमेंट के माध्यम से सुझाव अवश्य दे। साथ ही यह लेख आप के लिये कितना शिक्षाप्रद रहा कमेंट मे अपना सुझाव देना ना भूले- हमारे साथ जुडे- join Us

1 thought on “राजा जनक: मिथिला नरेश का जीवन परिचय | Raja Janak ka Jivan Parichay”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top