घड़ियाल, मगरमच्छ (आवास & स्थिति) | Gharial Crocodile in Hindi

घड़ियाल (Gharial) मगरमच्छ की एक प्रजाति है जिसे ‘गेवियल’ भी कहा जाता है। यह एक प्रकार का ‘एशियाई मगरमच्छ’ है, लेकिन वर्तमान मे यह विलुप्त होने के कगार पर है आई.यू.सी.एन (IUCN) ने घड़ियाल (Gharial) को रेड सूची मे डाला है अर्थात ये गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल हैं।

हालाकि घड़ियाल (Gharial) के संरक्षण के लिए कई प्रयास किये जा रहे है आज हम इस लेख मे घड़ियाल, मगरमच्छ (आवास & स्थिति) | Gharial Crocodile in Hindi मे जानेंगे.

Gharial
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घड़ियाल (Gharial Hindi)

घड़ियाल (Gharial) मगरमच्छ परिवार की एक प्रजाति है जिसके लंबे किंतु संकरे दाड़े होती हैं। घड़ियाल विलुप्त प्रजातियो में एक है। मगरमच्छ परिवार की 27 अलग-अलग प्रजातियाँ पाई जाती है। जिन्हें तीन भागो में बाटा गया है, ये निम्नलिखित है.

  • घड़ियाल (Gharial)
  • खारे पानी के मगरमच्छ (Salt Water Crocodile)
  • मगर (Mugger)

घड़ियाल के बारे में ( About Gharial in Hindi)

घड़ियाल (Gharial) को ‘गेवियल’ भी कहा जाता है। यह एक प्रकार का ‘एशियाई मगरमच्छ’ है, जो अपने पतले तथा लंबे थूथन के कारण अन्य मगरमच्छों से अलग होता है। घड़ियाल विशेष रूप से गहरे साफ तेज बहने वाले पानी और खड़ी, रेतीले तटों के सहारे नदी में निवास करते हैं। इस प्रकार यह स्वच्छ नदी जल के अच्छे संकेतक माने जाते हैं।

घड़ियाल (Gharial) के संरक्षण की स्थिति की बात करे तो आई.यू.सी.एन (IUCN) की रेड सूची में ये गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल हैं। इन्हें साइट्स (CITES) के परिशिष्ट-1 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनूसूची-1 में सूचीबद्ध किया गया है।

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घड़ियाल (Gharial) का प्राकृतिक आवास

  • ये ज्यादातर हिमालयी नदियों के ताजे पानी में पाए जाते हैं।
  • मध्य प्रदेश के विंध्य पर्वत के उत्तरी ढलानों (मुख्यतः चंबल नदी) को इनके प्राथमिक आवास के रूप में माना जाता है।
  • ये राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश) तथा कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में पाए जाते हैं। कुछ घड़ियाल, सोन, गंडक, हुगली और घाघरा नदियों में भी पाए जाते हैं।
  • ये साफ नदियों dot pi रहना पसंद करते हैं, जिनका तट बलुई हो। मछलियाँ इनका मुख्य भोजन है।
  • अन्य नदियों जैसे- सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, गिरवा, रामगंगा तथा म्यांमार की इरावदी नदी में भी ये पाए जाते हैं।

खारे पानी का मगरमच्छ (Salt Water Crocodile)

खारे पानी का मगरमच्छ पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे बड़ी जीवित मगरमच्छ प्रजाति है।

प्राकृतिक आवास: ये मगरमच्छ ओडिशा के भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, प. बंगाल में सुंदरबन तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते है। • साथ ही यह दक्षिण-पूर्व एशिया और उत्तर ऑस्ट्रेलिया में भी पाए जाते हैं।

संरक्षण की स्थिति: आई.यू.सी.एन (IUCN) की रेड सूची में कम चिंतनीय (Least Concern) श्रेणी में शामिल हैं। साइट्स (CITES) परिशिष्ट-1 में शामिल (ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और पापुआ न्यू गिनी की आबादी परिशिष्ट II के अंतर्गत शामिल) हैं। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल।

मगर (Magar)

ये आमतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाते हैं। साथ ही यह पूर्व में म्यांमार तथा पश्चिम में ईरान में भी जाए जाते हैं। हालाँकि यह नेपाल तथा म्यांमार में विलुप्त हो चुके हैं।

प्राकृतिक आवास: ये मुख्यतः मीठे पानी जैसे नदी, झील, पहाड़ी नदियों और तालाबों में पाए जाते हैं। इसके साथ-साथ यह ताजे पानी और तटीय खारे पानी के लैगून में भी पाए जाते हैं

संरक्षण की स्थिति: आई.यू.सी.एन. (IUCN) की संकटग्रस्त प्रजाति की रेड सूची में ये सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में शामिल हैं। साइट्स (CITES) की परिशिष्ट-1 में शामिल। तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल।

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संग्क्षण के प्रयास

IUCN-SSC क्रोकोडाइल स्पेशलिस्ट ग्रुप (CSG): आईयूसीएन एसएससी क्रोकोडाइल स्पेशलिस्ट ग्रुप (सीएसजी) जीव- विज्ञानियों, वन्यजीव प्रबंधकों, सरकारी अधिकारियों, स्वतंत्र शोध कर्ताओं, गैर सरकार (एनजीओ) प्रतिनिधियों, किसानों, व्यापारियों नेताओं और संरक्षण में ‘सक्रिय रूप से शामिल निजी कंपनियों का एक विश्वव्यापी नेटवर्क है।

Credit: Namami Gange

मगरमच्छ संरक्षण परियोजना

मगरमच्छ संरक्षण के लिये 1974 ई. में परियोजना बनाई गई तथा 1978 तक कुल 16 मगरमच्छ प्रजनन केंद्र स्थापित किये गए। वर्ष 1975 में पहली बार ओडिशा में घड़ियाल और खारे पानी के मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की गई और इसके उपरांत ‘मगर संरक्षण कार्यक्रम’ प्रारंभ किया गया।

वर्ष 1975 में केंद्रीय वन एनं पर्यावरण मंत्रालय ने ‘संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम’ के सहयोग से भितरकनिका उद्यान के अंदर ‘दंगमाला’ में ‘मगरमच्छ प्रजनन और पालन परियोजना’ की शुरूआत की।

इसी वर्ष मगरमच्छों की संख्या में वृद्धि करने के लिये अंगुल जिले के ‘टिकरपाड़ा अभयारण्य’ में ‘घड़ियाल परियोजना’ को प्रारंभ किया गया, जनवरी 2021 में, भीतरकनिका में 1,768 खारे पानी के मगरमच्छ थे, जिनकी संख्या वर्ष 1979 में 96 थी। ओडिशा का ‘भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान’ जो विश्व धरोहर सूची में शामिल है, के लवणयुक्त पानी में रहने वाले मगरमच्छों की संख्या सर्वाधिक है।

  • ‘केंद्रीय मगरमच्छ प्रजनन एवं प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान’ हैदराबाद में स्थित है।
  • मगरमच्छ अभयारण्यों की सर्वाधिक संख्या आंध्र प्रदेश में है।
  • मगरमच्छ प्रजनन एवं प्रबंधन प्रोजेक्ट 1975 में FAO तथा UNDP की सहायता से शुरू किया गया।
  • 1970 के दशक में शुरू की गई ‘भागवतपुर मगरमच्छ परियोजना’ (प. बंगाल) का उद्देश्य खारे पानी में मगरमच्छों की संख्या में वृद्धि करना था।

स्रोत: क्लास नोट्स (UPSC)

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