दिमाग को शांत कैसे करें | Dimag ko Shant Kaise Rakhe

दिमाग / माइंड या मस्तिष्क को शांत कैसे रखे – Dimag ko Shant Kaise Rakhe

दिमाग को शांत करना अर्थात जीवन को व्यवस्थित व खुशहाल करना है। मानव सभ्यता की उत्पत्ति जबसे हुई है, तभी से मनुष्य अपने जीवन को सुव्यवस्थित व क्रमबध्द रुप से चलाने का प्रयास करे रहा है। हालाकि यह प्रक्रिया सभी के साथ होता है, लेकिन कई मनुष्य समयानुसार जीवन को व्यवस्थित कर लेते है, और खुशहाल जीवन का आनंद लेते है। अधिकांश लोग जीवन का आनंद नही ले पाते है। कई कारणो मे से दिमाग का शांत न रहना भी एक कारण, जो जीवन को अधिक संहर्षशील बनाने का कार्य करता है।

इस लेख मे हम “दिमाग को शांत कैसे करें” (Dimag ko Shant Kaise Rakhe) की प्रक्रिया जानेंगे, इस प्रक्रिया को हमने आसान भाषा मे समझाने का प्रयास किया है, उम्मीद है यह लेख आपके जीवन को अकल्पनीय तरीके से बदलने मे प्रयास करेगा, और आपके जीवन मे खुशिया लायेगा।

Dimag ko Shant Kaise Rakhe

माइंड को शांत कैसे रखे – Mind ko shant kaise rakhe

माइंड या दिमाग को शांत करने की प्रक्रिया आसान है, बस हमे दिमाग को बहकाने (अशांत) करने वाले कारको को खोजना होगा। जैसे- किसी मनुष्य को अधिक सुगंधित फूल, तेल, अगरबत्ती, आदि के कारण सिर दर्द होने लगता है। इनके साथ-साथ दिमाग असंतुलित होने के कई कारण है। जो निम्नलिखित है।

दिमाग अशांत होने के कारण

  • जरुरत से ज्यादा सोचना
  • अधिक चिंतन करना
  • अधिक भावुक होना
  • पूरी नींद न लेना
  • किसी बीमारी के वजह से
  • असंतुलित वातावरण जैसे- अधिक आवाज, अधिक सुगंध, आदि

ऊपर दिये गये “दिमाग अशांत होने के कारण” मुख्य कारण है। जो हमारे रोजमर्रा के जीवन मे आते-जाते रहते है। इन्ही कारणो को हम विस्तार से जानेंगे, और सीखेंगे की कैसे दिमाग को शांत किया जा सकता है। ताकी हम एक संतुलित जीवन का आनंद उठा सके।

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जरुरत से ज्यादा सोचना

हम मे से कई ऐसे लोग है, जो अधिक सोचने के शिकार है। और इसका परिणाम हमारे जीवन को अस्वस्थ रखता है। हम सब सोचते है की अधिक सोचना, बुध्दि के विकाश मे सहायक होता है। बल्कि ऐसा नही है। क्योकी

“किसी भी वस्तु की अधिकता उस वस्तु की वास्तविकता को खत्म कर देता है”

By:- सूरज नारायण

जब हम किसी वस्तु को अधिक महत्व देने लगते है तो, वह वस्तु हमारे लिये हानिकारक साबित होती है, जैसे- अधिक पानी पीने से हमारा स्वास्थ खराब हो सकता है, जबकी हमे पता है की “जल ही जीवन है” यहां स्वास्थ्य खराब होने का मुख्य कारण अधिकता है, इसलिये जीवन जीने के लिये प्रकृति के साथ ताल-मेल का होना जरुरी है, तभी हम संतुलित जीवन जी सकते है।

अर्थात- ज्यादा न सोचे, और जीवन को संतुलित रखने का प्रयास करें

अधिक चिंतन करना

ज्यादा न सोचना या अधिक चिंतन करने का भाव एक जैसा ही है, लेकिन थोडी असमानता है। ज्यादा सोचना अर्थात किसी भी वस्तु पर अधिक सोचना या कल्पना करना, जबकी चिंतन किसी विशेष वस्तु का होता है। जो कभी-कभी होता है।

Dimag ko Shant Kaise Rakhe

इसलिये हमे अधिक चिंतन करने से बचना चाहिये, अगर आप भारतीय संस्कृति पर विश्वास रखते है और शिक्षित भी है तो आप इस सुविचार पर अमल कर सकते है। “जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा अच्छा ही होगा” यह सुविचार आपके अधिक चिंतन करने के विचार को रोक सकता है, जब भी आप अधिक चिंतन की प्रक्रिया मे हो तो, इस विचार को जरुर याद करे- “जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा अच्छा ही होगा”

बीमारी के वजह से

दिमाग का शांत न होने का कारण, बीमारी भी हो सकती है। अगर आप कई वर्षो से किसी बीमारी के शिकार है तो, यह आपके दिमाग को अशांत रख सकता है। आपको बेचैनी, सिर दर्द जैसी हालत देखने को मिल सकती है।

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दिमाग को शांत कैसे रखें – Dimag ko shant kaise kare

दिमाग को शांत करने के लिये आपको निम्न बातो का ख्याल रखना होगा, अगर आप इन बातो को अपने दिनचर्या मे अपनाते है, तो आपको अकल्पनीय बदलाय देखने को मिल सकते है। – mind shant kaise kare

दिमाग को शांत रखने का उपाय

  • सुबह जल्दी उठे (पूरी नींद अवश्य ले)
  • योगा व ध्यान करें
  • ईश्वर की पूजा करें
  • चेहरे पर मुस्कान रखे
  • अधिक चिंतन व कल्पना ना करें

नोट- दिमाग को अशांत करने वाले कारको को खोजे, और उनसे दूरी बनाये। (Dimag ko Shant Kaise Rakhe)

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