इन 9 नियमो से करें ब्रम्हचर्य का पालन – brahmacharya ka palan kaise kare

Brahmacharya ka palan kaise kare: ब्रम्हचर्य शब्द की उत्पत्ति वैदिक काल मे हुआ था जिसका समयकाल 1500 ई०पू० से 600 ई०पू० माना जाता है। यह वैदिक काल मे मनुष्यों के लिये बताये गये 4 आश्रमो या आश्रम व्यवस्थायो मे से एक है।

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इन 4 आश्रम व्यवस्थाओ का पूर्णतया पालन करेगा वह अंत मे मोक्ष की प्राप्ति करेगा। नीचे सारणी मे हमने 4 आश्रमो को विस्तार से बताया है जिनमे ब्रम्हचर्य पहला आश्रम व्यवस्था है आपको यहाँ बताना चाहुंगा कि आश्रम का अर्थ विशिष्ट कर्म से है अर्थात जो व्यक्ति इन 4 विशिष्ट कर्मों के अनुसार जीवन का निर्वहन करता है वह अंत: मोक्ष या सुखमय जीवन प्राप्त करता है।

brahmacharya ka palan kaise kare Sadhu
ब्रम्हचर्य का पालन करने वाले साधु

चार आश्रमो या विशिष्ट कर्मों मे ब्रम्हचर्य पहला कर्म है अत: इसके पूर्णतया पालन करने से, आने वाले आश्रमो के पालन मे सुनिश्चितता व विश्वास का सृजन होता है जिसके परिणाम स्वरुप आप वैदिक समाज के एक मुख्य अंश को जीवित रुप देने व जीवन को उपयोगी बनाने में समर्थ होते है। आइये जाते है कि ब्रम्हचर्य का पालन कैसे करें? brahmacharya ka palan kaise kare.

ब्रम्हचर्य का पालन कैसे करें? (brahmacharya ka palan kaise kare)

यह सत्य है कि ब्रम्हचर्य का पालन करना आसान नही, लेकिन कुछ विशेष विधियों के द्वारा इसे साधा जा सकता है, लेकिन उन विधियो को करने से पूर्व ब्रम्हचर्य को समझना समझदारी होगी, तत्पश्चात आप ब्रम्हचर्य का पालन आसानी से कर पायेंगे। अनंत जीवन की टीम ने पहले से ही ब्रम्हचर्य पर एक लेख लिख चुका है अत: ब्रम्हचर्य से सम्बंधित विशेष जानकारी हेतु उस पेज पर जाए, आइये हम यहाँ ब्रम्हचर्य का पालन कैसे करें? (brahmacharya ka palan kaise kare) पर कुछ साधारण विधिया जाने।

ब्रम्हचर्य का पालन कैसे करें? (brahmacharya ka palan kaise kare)

  • प्रात: काल उठे, योग व ध्यान जैसी क्रिया करें ताकि मन शांत रहे।
  • सात्विक भोजन का सेवन करें अर्थात मांस, मदिरा या अन्य गर्म वस्तुयों को खाने से बचे।
  • विकारी इच्छाएँ जागृत करने वाले विडीओज़, चित्र या किताबें पढ़ने और देखने से परहेज़ करें।
  • किसी भी विकारी आवेग उत्पन्न करते वाले वस्तुये (गलत संगत, विडीयो, फोटो, गाना, आदि) से दूर रहे।
  • मन में आ रहे नकारात्मक विचारो को तुरंत खत्म कर दे। अन्यथा यह आदता का स्वरुप ले लेंगी।
  • अगर ब्रम्हचर्य का पालन टूट जाये तो तुरंत स्वयं से माफ़ी माँग ले एवं फिर से ब्रह्मचर्य का पालन करने लगे।
  • ऐसा कोई भी कार्य जो आपके ब्रम्हचर्य मे विकार उत्पन्न करता हो, उसे छोड़ देना चाहिए।
  • अगर आप किसी के प्रति आकर्षित हो रहे है तो उसे आत्मा के स्वरुप मे देंखे, इससे आप विकारी विचारो से बच जायेंगे।
  • अगर आप अधिकतर फ्री रहते है तो स्वयं को किसी विशेष कार्य से बांधे।

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नोट- इन नियमो पालन करने हेतु स्वयं पर विश्वास एवं दृढशक्ति का मजबूत होना आवश्यक है आपको जानना चाहिये कि चारो आश्रमो मे ब्रम्हचर्य आश्रम सबसे कठिन आश्रमों मे से एक है। अत: इसका पालन करने हेतु जीवन के सभी पहलुओ पर नजर रखना बेहद आवश्यक है. जिसके लिये आप अपने दिनचर्या सारणी को सुनिश्चित कर सकते है। आपको यह लेख (brahmacharya ka palan kaise kare) कैसा लगा, कमेंट मे राय जरुर दे।

ब्रम्हचर्य व्यवस्था एवं आश्रम व्यवस्था क्या है?

आश्रम व्यवस्था के अंतरगर्त व्यक्ति के जीवन को 4 भागों मे बाटा गया है यह भाग मनुष्य की आयु को 100 मानकर किया गया है। चार आश्रमो को 25-25 सालों मे बाटा गया है अर्थात प्रत्येक आश्रम का समयकाल 25 वर्ष होता है। अगर आप आश्रम शब्द को ऋषि-मुनियों के रहने के स्थान से परिभाषित कर रहे है तो आप गलत है यहाँ आश्रम का अर्थ विशिष्ट कर्म से है। आइये चारों आश्रमो के नाम जानते है।

  1. ब्रम्हचर्य आश्रम काल
  2. गृहस्थ आश्रम काल
  3. वानप्रस्थ आश्रम काल
  4. सन्यास आश्रम काल

उपर्युक्त बताये गये आश्रमो के अनुसार ही वैदिक काल के लोग जीवन व्यापन करते थे। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इन आश्रमो का पालन कर जीवन व्यापन करेगा, उसका जीवन सुखमय व स्वास्थपूर्ण होगा

brahmacharya ka palan kaise kare

निष्कर्ष: उत्तर वैदिक समाज के लोग इन चार आश्रमों का अनुपालन कर अपना जीवन व्यापन करते थे। इस कथन से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उत्तर वैदिक समाज के लोग सुव्यव्स्थित जीवन व्यापन करते थे। जैसा कि आपने इस लेख मे चार आश्रमो ब्रम्हचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास आश्रम काल को जानकारी प्राप्त की, मै यहाँ पुष्टि कर देना चाहता हू कि इस आश्रमो का उपयोग क्रम अनुसार किया जाता था। अर्थात एक आश्रम काल को व्यतीत करने के पश्चात ही अगले आश्रम काल मे जाया जाता था। उम्मिद है आपके पश्न "ब्रम्हचर्य का पालन कैसे करें? brahmacharya ka palan kaise kare" मिल गया होगा, अधिक जानकारी हेतु अपने विचार कमेंट मे सांझा करेंं। 

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