अहिंसा परमो धर्म: अर्थ [पूर्ण श्लोक] | Ahinsa Parmo Dharma

अहिंसा परमो धर्म पूरा श्लोक व अर्थ जाने

अहिंसा परमो धर्म: श्लोक महाभारत का अंश है, सर्वप्रथम इस श्लोक को भगवान श्रीकृष्ण जी के मुखारविंदु से सुना गया था। महाभारत मे “अहिंसा परमो धर्म:” से जुडे नानाप्रकार के श्लोक हैं, नीचे तालिका मे सभी श्लोको का वर्णन किया गया है। इस लेख मे हम अहिंसा परमो धर्म: (Ahinsa Parmo Dharma) श्लोक का पूरा श्लोक व व्याख्या जानेंगे।

Ahinsa Parmo Dharma

अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च

पूर्ण श्लोक

अहिंसा सबसे बडा धर्म है, और धर्म रक्षार्थ (धर्म की रक्षा के लिये ) हिंसा भी उसी प्रकार श्रेष्ठ है।

अहिंसा परमो धर्म पूरा श्लोक

अहिंसा परमो धर्म: का पूरा श्लोक- “अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च “ हैं।

हर धर्म का एक ही उद्देश्य होता है ” प्रेम व शांती के मार्ग के पर चलना” जो इस धर्म को ना माने उससें युध्द करना ही हमारा धर्म बन जाता है। चाहे वो कितना प्रिय क्यू ना हो, धर्म का हिंसा करने वाले के प्रति हिंसा करना गलत नही। इंसाफ के लिये हिंसा करना, हिंसा नही होती।

अहिंसा परमो धर्म का अर्थ

व्याख्या : अहिंसा मानवों का परम धर्म है, किंतु धर्म की रक्षा के लिये हिंसा करना अहिंसा नही है। अर्थात- धर्म की रक्षा के लिये हिंसा करना पाप नही पुण्य है। धर्म के रक्षा हेतु, आप अहिंसा के मार्ग पर चल सकते है। धर्म के रक्षा के लिये की जाने वाली हिंसा, हिंसा की श्रेणी मे नही आता।

अहिंसा प्रमो धर्म: श्लोक से जुडे अन्य श्लोकAhinsa Parmo Dharma

  • अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तप:
  • अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दम:
  • अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परं फलम्
  • अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्म: प्रवर्तते
  • अहिंसा परमंं दानमहिंसा परमं तप:
  • अहिंसा परमं मित्रमहिंसा परमं सुखम्
  • अहिंसा परमो धर्म: सर्वप्राणभृतां स्मृत:
  • अहिंसालक्षणो धर्मो हिंसा चाधर्मलक्षणम्
  1. अहिंसा परमो धर्म पूरा श्लोक (Ahinsa Parmo Dharma Pura Shlok) – अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च

ये सभी श्लोक अहिंसा परमो धर्म: श्लोक से मिलते है, सभी श्लोको मे अहिंसा को उच्च (श्रेष्ठ) बताया गया है। इन श्लोको के अलावा अन्य कई श्लोक है, जहाँ अहिंसा को हिंसा से उपर का दर्जा दिया गया है। Ahinsa Parmo Dharma

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महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ
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 जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं अर्थ
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Ahimsa Paramo Dharma in English

“अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च” अग्रेंजी में – Ahimsa Paramo Dharma Dharma Himsa tathaiva cha

Non-Violence is the ultimate Dharma.
So too is violence is service of Dharma

– Ahimsa Paramo Dharma in English

ahinsa parmo dharma shlok –Ahimsa Paramo Dharma Dharma Himsa tathaiva cha

अहिंसा परमो धर्म पूरा श्लोक हिंदी मे- “अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च”

अहिंसा परमो धर्म: अर्थ [पूर्ण श्लोक] | Ahinsa Parmo Dharma
अहिंसा परमो धर्म: पूरा श्लोक – Ahinsa Parmo Dharma slok

लोगो ने पूछा – People Also Ask

प्रश्न – अहिंसा परमो धर्म: श्लोक कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर – हिंदूयो के पौराणिक ग्रंथ ‘महाभारत’ से

प्रश्न – अहिंसा परमो धर्म: पुरा श्लोक क्या है ?
उत्तर – “अहिंसा परमो धर्म: धर्म हिंसा तथैव च” होता है।

प्रश – हिंसा व अहिंसा मे क्या अंतर है ?
उत्तर – हिंसा का अर्थ अपराध से है तथा अहिंसा का अर्थ निरपराध है।

प्रश – अहिंसा का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर – अहिंसा का अर्थ निरपराध से है, या यू कहे जो हिंसा (अपराध) न करता हो, उसे अहिंसा कहते है। उसी प्रकार अहिंसा का दूसरा शब्द – बेकसूर, निर्दोस, निरपराध (आदि) होता है।

प्रश – तथैव का अर्थ क्या होता है?
उत्तर – तथैव अर्थात “वैसा ही”

प्रश्न – सत्य और अहिंसा का क्या अर्थ है ?
उत्तर – सत्य व अहिंसा को महात्मा गांधी के विचारो से जोड कर देखा जाता है। जिसने कभी झूठ न बोला हो, तथा जिसने कभी अपराध न किया हो, उसे सत्य व अहिंसा के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कहाँ जाता है। अर्थात, हमेशा सत्य बोलने वाला, कभी भी हिंसा न करने वाला व्यक्ति सत्य व अहिंसा का पुजारी होता है।

प्रश – अहिंसा का पालन क्यो करना चाहिये ?
उत्तर – अहिंसा का अर्थ निरपराध से है। निरपराध अर्थात जिसने कोई भी अपराध न किया हो, या यू कहे जिसने कभी हिंसा, बुराई, पाप, न किया हो वो अहिंसक होता है।

इस लेख मे हमने अहिंसा परमो धर्म: (Ahinsa Parmo Dharma) का पूरा श्लोक व अर्थ जाना, यह लेख आप के लिये कितना मददगार रहा, कमेंट मे सुझाव अवश्य दे, किसी भी प्रकार के त्रुटि मे हमें क्षमा करें, तथा हमेंं अवगत करायें । Join Us

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