Hindi Paheli: हिंदी मजेदार पहेलिया, बुझो तो जाने ?

Hindi Paheli: पहेलिया बुझना तो सभी को पसंद है। लेकिन पहेली कहने वाले दादा-दादी अब पहेली नही कहते, इसलिये आज हमने इस संग्रह मे 50 से अधिक पहेलियों का संग्रह किया है। जिसे आप दूसरो से पूछ सकते है। और स्वयं से बूझ भी सकते है। क्योकी पहेलियो का उत्तर नही दिया गया है। आप कमेंट मे उत्तर पूछ सकते है।

Hindi Paheli
हिंदी पहेलिया

हिंदी पहेली – Hindi Paheli

अंत कटे तो दूसरा बन जाती |
चाय व सब्जी का स्वाद बढाती ||

हरा – भरा है मेरा अंग ,रहता हूँ डिब्बी में बंद |
डिब्बी खोलना सरल है काम ,बताओ बच्चो मेरा नाम ||

मीठा हूँ सब करे पसंद , मोटी दीवारों में बंद |
मेरा पेड़ बहुत है फलता ,लेकिन कभी नहीं है जलता ||

दो अक्षर का नाम बताया। इसका फल सबको भाया।।
सबसे ज्यादा किस्म बताई। फल में गुठली है बताई।।

फटेहाल रहता है हरदम ,द्वार -द्वार तक जाए |
चाहे कितना जतन करे, यह मनचाहा न पाए ||

जब ये जलते है, तो रोते है |
सब इन्हें जलाकर खुश होते है ||

धीरे से चलकर यह है आती
खिल-खिलाकर हंसी बनाती
न है नाक पर और न कान
होंठो पर है उसकी पहचान

सीटी इसकी घर-घर बाजे
खाना पके पल भर लागे
मिलता सबको चावल-दाल
बूझो गोपू का यह सवाल

उत्तर देंखे – पहेलिया

पहेलिया – paheliyan

सारे तन में छेद कई हैं
इन छेदों का भेद यही है
ये ना हों तो मैं बेकार
इनसे ही है मेरा संसार
तब ही मैं लाऊं सुरों की बहार

नरम कुरकुरा नाजुक काया
बिखर जाऊं गर जोर से दबाया
पर जब खाने की हो तैयारी
मुझ बिन अधूरी रोटी तरकारी
आग में तपकर पकता हूं
गोल-गोल चांद सा दिखता हूं

मनोवैज्ञानिक फैक्ट

पत्तो के सम उसका रंग ,कुतर – कुतर खाने का ढंग |
पिंजरे में भी पाला जाता ,नाम बताओ अब तो ज्ञाता ||

रात हुई तो जनम लिया ,सुबह हूँ मोती जैसी |
सूरज देखूं तो मर जाऊं ,मेरी किस्मत कैसी ||

रूप है काला खून बैगनी
ऐसी मेरी फितरत है
मेरी चमड़ी लोगों को भाए
ऐसी मेरी किस्मत है
बारिश में मैं आती हूं
मुंह का स्वाद बढ़ाती हूं

लगे मात्रा तो हूं खाक
हटे मात्रा तो पक्षी सुरीला
काला मेरा रूप कुरूप
करे क्या काला मुझको धूप
नाम बताओ हो ना चूक

लाल रंग है घर मेरा अंग है
सबमें ही मैं पया जाऊं
लेकिन तब हो बड़ी मुसीबत
जब मैं कहीं बह जाऊं
हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई
हरेक के अंदर मैं मिलता भाई

नई पहेलिया – New Paheli

न सीखा संगीत कहीं पर
न सीखा कोई गीत
लेकिन इसकी मीठी वाणी में
भरा हुआ संगीत
सुबह सुबह ये करे रियाज
मन को भाती इसकी आवाज

जलेबी को हिंदी मे क्या कहते ?

नोच-नोच कर खाता मांस
जीव है दुनिया का ये खास
दो अक्षर का छोटा नाम
लेकिन इसका मोटा काम
उड़ता रहता सुबह शाम

सुबह-सुबह ही आता हूँ,
दुनिया की खबर सुनाता हूँ,
बिन मेरे उदास हो जाते,
सबका प्यारा रहता हूँ।

पीली पोखर पीले अंडे
बताओ जी बताओ
नहीं तो पड़ेंगे डंडे

हरे रंग की चीज़ निराली, पी बैठी जब पानी |
सूख गयी तब क्या कहने, छोड़ी लाल निशानी

इसका तीन अक्षर का है नाम । वृक्ष आता औषधि के काम ।।
आदि कटे जवानी उतर जाती । मध्य कटे हिमालय बन जाती ।।

तीन अक्षर मे नाम आता। औषधी में यह काम आता ।।
प्रथम कटे लावा कहलाता।। मध्य कटे तो नाम बतलाता।।

स्वर्ण जैसा है नाम मेरा । छांव, दाव से पडे काम तेरा।।
चार अक्षर मेरे नाम में आते। दूजे में कृष्ण भी कहलाते।।

अटपटे सवाल

तीन अक्षर का नाम बतलाये। फल इसका मेवा कहलावे।।
प्रथम कट जाए यह तो धन कहलाता। मध्य कटे तो भगतों में बोला जाता।।

तीन अक्षर में आता है नाम। आए छांव, ईंधन औषध के काम ।।
दूजा नाम बांध कहलाता। यह सकल पड़े है बतलाता।।

छोटी पहेलिया – chhoti paheliya

बिन बताये रात को आते हैं बिन चोरी किये गायब हो जाते हैं बताओ तो क्या हैं ?

बूझो भैया एक पहेली जब भी काटो तो निकले नई नवेली

ना कभी किसी से किया झगड़ा ना कभी करी लड़ाई फिर भी होती रोज पिटाई

एक टांग पर खाड़ी रहूँ मैं , एक जगह पर अड़ी रहूँ मैं . अंधियारे को दूर भगाऊं , धीरे-धीरे , गलती जाऊं

लंबा-चौड़ा रूप निराला , उजली देह किनारा काला . जो धोबिन करती है काम , उसका भी वही है नाम

एक पुरुष का अचरज भेद , हाड़-हाड़ में वाके छेद . मोहि अचंभा आवे ऐसे , जीव बसे हैं वामे कैसे

कली है , पर काग नहीं , लंबी है , पर नाग नहीं . बल खाती , पर डोर नहीं , बांधती है , पर डोर नहीं

नहीं मैं मिलती बाग में, आधी फल हूँ, आधी फूल। काली हूँ पर मीठी हूँ, खा के न पाया कोई भूल।

खरीदने पर कला जलने पर लाल फेंकने पर सफ़ेद बताओ क्या है ?

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