ज्यादा बोलना [फायदा या नुकसान]। jyada bolna | sahi bolana ।

ज्यादा बोलना सही है या गलत ये ऐसा प्रश्न है जो कुछ ही लोगों के दिमाग़ में ही उठता है , ये प्रश्न तब भी उठ सकता है जब आप को  कोई बोल देता है कि आप बहुत ज्यादा बोलते है , इसलिये jyada bolana इस बात पर भी निर्भर करता है की आप कहा बोल रहे है, किस जगह बोल रहे है एक भाषा में बोले तो बोलना माहौल पर भी निर्भर करता है ज्यादा बोलना सही है या गलत को विस्तर से

ज्यादा बोलना सही है या गलत
ज्यादा बोलना सही है या गलत

क्या आप भी उन्ही मे से हो जो बिना मतलब के ज्यादा बोलना, हर वक्त कुछ न कुछ बडबडाते रहते है अंदर ही अंदर कुछ न कुछ सोचते रहते है अगर आप का जवाब हा है तो ये पोस्ट आप के लिये है आज हम इस पोस्ट मे ज्यादा बोलने वाले के बारे मे बात करेंगे कि ऐसे लोग कैसे होते है , वो इतना ज्यादा सोचते या बोलते क्यू है क्या है कोई बीमारी है या प्राकृतिक स्वभाव

कहाँ बोलना चाहिये कहाँ नही

आप को यह ध्यान देना होगा की ज्यादा बोलना या देर तक बोलना मायने नहीं रखता है जरूरी है आप क्या बोलते है और उससे भी ज्यादा जरूरी है आप कहा बोलते है ज्यादा बोलने के मुकाबले चुप-चाप इंसान की कीमत होती है

कीमत घडी की नही समय की होती है अगर कोई घडी सही समय के बजाय ज्यादा या कम समय बताती है तो उसकी कीमत कम हो जाती है , एक भाषा में उसकी कोई कीमत नहीं करता है वैसे ही इंसान की, ज्यादा बोलना हो या ज्यादा चुप रहना दोनों नुकसान दायक हो सकते है सफलता कैसे प्राप्त करे

कीमत घडी की नहीं होती कीमत तो समय की होती है
ज्यादा बोलना सही है या गलत
ज्यादा बोलना सही है या गलत

ज्यादा बोलना ke फायदे व निकसान

ज्यादा बोलना का मतलब है की किसी छोटी बात को बड़ा करके बताना , इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं है की आप को किसी भी शब्द को विस्तार से नहीं बताना है , विस्तार से बताने का मतलब की उसके बारे में पुरी जानकारी देना जो उसके लिये जरूरी हो ,छोटी बात को बड़ा करके बताने का मतलब ,वो सारी चीजे बताना जो न तो जरूरी ही है न ही तो जिस टोपिक पे आप बात कर रहे है उससे जुडा ही है ,

बस आप खुद का और दूसरों का समय बर्बाद करने का रास्ता पकड कर खुद को भी और दूसरों को भी उस रास्ते पे दौडा रहे है , जो कि मंजिल कि ओर न जाकर गलत राह पर चलने जैसा है ,आचार्य प्रशांत के अनमोल विचार

बोलने की शैली

कला या शैली एक ही शब्द है इसका मतलब की हम दूसरों के सामने अपने विचार अच्छे से कैसे रखे जिससे वो हमारी बात समझ भी जाये और अगली बार कोई प्रश्न पुछने में हिचके भी न / ज्यादा बोलना सही है या गलत अब तो आप समझ ही गये होंगे

बोलने की कला में ये बात को याद रखना होगा की ज्यादा न बोले, जितना काम लायक हो उतना ही बोले हर क्षेत्र में महारथ हासिल करने की कोशिश ना करें आप जिस क्षेत्र में माहिर है उसी की जानकारी देने की रुचि रखे , इतना आप अपने मन में बिठा ले कि आप ज्ञानी नहीं है न ही आप को सब पता ही है जिस क्षेत्र में आप अपनी राय भर या कल्पना बस दे सकते है , तो ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने से बचे , लेकिन जिस क्षेत्र में आप है अगर उस क्षेत्र का प्रश्न है तो आप जवाब जरूर दे ,

अगर आप इन सब बातों के नजरिये से बात करते है तो उम्मीद है आप अपने बोलने की शैली में परिवर्तन जरूर पायेंगे /

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ज्यादा बोलना

अगर आप को कोई बोलता है की आप ज्यादा बोलते है तो घबराइये मत क्योंकि “आप ज्यादा बोलते है” ये शब्द वो लोग भी कह सकते जिनको आप कि बात समझ नहीं आ रही होगी , या ये भी हो सकता है आप को वो पसंद ना करता है

अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप, अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। इसका मतलब ये हुआ की जरूरत से ज्यादा बोलना या चुप रहना दोनों ही अच्छा नही होता । ..ज्यादा बोलने से भी काफी नुकसान होता है। अगर आपको चुप रहने से आप को लाभ हो रहा है तो वहां चुप रहिये

अगर आप ज्यादा बोलते है तो आप को खुद पे ध्यान देना होगा , क्या आप को पता है ज्यादा बोलना और जल्दी – जल्दी बोलना मे अंतर होता है ज्यादा बोलने से मतलब है की आप बेवजह बातो को बडा करके बता रहे है जिन बातो का आपस मे कोइ सम्बंध नही उस बात को भी आप बताते चले जा रहे है ,ऐसा करने से आप को बचना होगा , आप को एक बात याद रखनी होगी ज्यादा बोलने वाले इंशान की कीमत कम होती है ,

अगर आप गाव मे रहते हो तो आप को पता होगा ये सब क्योकी गाव शहर के लोगो कि अपेक्षा गाव के लोग आपस मे ज्यादा बात करते है , और ऐसी जगह आप को वो लोग जरुर मिल जायेंगे जो ज्यादा बोलते है , गाव के लोग ऐशे लोगो को बहुत बकबक करता है , बकवास करता है , इत्यदि शब्दो से उस इंशान का परिचय कराते है अब तो आप समझ गये होंगे ज्यादा बोलना कितना लाभदायक है

ज्यादा बोलना सही है या गलत पर सुविचार पढे , क्या आप नये सुविचार की खोज मे है

ज्यादा बोलने के नुकसान

ज्यादा बोलना या कीसी बात को बार – बार बोलना बाइपोलर डिसऑर्डर का लक्षण है। ज्यादा बोलने वाले लोग अपनी बात के आगे किसी की बात नहीं सुनते। इसके परिणाम स्वरुप दूसरों को बोलने का मौका नहीं मिलता और इनकी बात – चीत एक तरफा रह जाता  है। इस बीमारी को ठीक करने के लिये तनाव / चिंता नही लेना चाहिए।

कैसे बोलना चाहिये– bolana sikhe

जब बात है सबसे अच्छा बोलने की तो हम धैर्यवान व्यक्ती की याद आती है , जैसे स्वामी विवेकानंद , चाण्क्य, ये ऐशे लोग है जब भी आप इनके द्वारा कही हुई बातो पर ध्यान देंगे तो आप को पता चलेगा की ये लोग ज्यादा बोलते तो नही थे परंतु जो भी बोलते थे उस शब्द मे गहराइ छुपी रहती थी अपने शब्दो मे धैर्य बना कर , वाणी को मधुर बना कर , और कम शब्दो मे अपनी बात को खत्म करने की कोशिश करे , जितना काम हो बस उतना ही बोले ,अपने वाणी पर पकड रखे , उसे फिसलने ना दे

जल्दी- जल्दी बोलने का मतलब ये है की आप कीसी बात को इतना तेज कह देते है की सामने वाला सुन ही नही पाता , या फिर कोई बात आप अपने मन मे ही बोल लेते है , य बहुत धीरे – धीरे बोलते है, ऐसा करने से बचना चाहिये , ना तो आप को ज्यादा बोलना चाहिये , ना ही आप को जल्दी-जल्दी बोलना चाहिये , ना ही आप को धीरे ही बोलना चाहिये , आप के मन मे प्रश्न उठ रहा होगा फिर कैसे बोले , आइये जानते है

kam bolane ke fayade-कम बोलने के फायदे

क्या आप को पता है ज्यादा बोलना , जल्दी-जल्दी बोलना , धीरे – धीरे बोलना ,से भी ज्यादा खतरनाक है चुप रहा , एक शब्द मे बोला जाय तो चुप्पा इंशान , गाव की भाषा मे कहा गया है एक चुप्पा सौ को हराये , kam bolane ke fayade

कहने का मतलब आप से कुछ पुछा जा रहा, और आप छुप हो , अब पुछने वाले को ठोडी पता आप क्यू चुप है , आप को क्या हुआ है , किस लिये चुप है , आप को सारे प्रश्नो के उत्तर देने के लिये बोलना तो पडेगा ही , लेकिन आप को चुप रहने का ठीका ले रखा है , जब वो सारी कोशिशे कर लेन्गेगआप को बुलवाने का तो , तब आप से विनती करेंगे , आपका इंतजार करेंगे आप कब बोलेंगे इसलिये कहा गया है एक चुप्पा सौ को हराये । kam bolane ke fayade

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